औरतों का दिमाग मर्दों के दिमाग से डबल होता है, पहली बार जानिए कैसे

मुंबई. मनोवैज्ञानिक मकी का मानना है कि औरतों की माहवारी का उनके दिमाग़ पर असर पड़ना इत्तिफ़ाक़िया है। वर्षों तक रिसर्चर यही मानते रहे कि जब महिलाओं में ओव्यूलेशन होता है तो उन्हें सेहतमंद मर्द के साथ सेक्स की ख़्वाहिश होती है। लेकिन हालिया रिसर्च इसे नकारती हैं।

मर्दों और औरतों के दिमाग़ के काम करने के तरीक़े में एक और बड़ा फ़र्क़ है। कोई भी काम करने में मर्दों के दिमाग़ का एक हिस्सा काम करता है। जबकि औरतों के दिमाग़ के दोनों हिस्से काम करते हैं। दिमाग़ के दाएं या बांए हिस्से के काम करने के तरीक़े का संबंध हाथ से है। मिसाल के लिए अगर कोई अपने दाएं हाथ का इस्तेमाल करता है तो भाषा का ज्ञान उसके दिमाग़ के बाएं हिस्से में होता है। लेकिन औरतों के दिमाग़ की संरचना इससे भी अलग होती है। अब ऐसा क्यों है, ये अभी तक रहस्य है।

वर्ष 2002 में की गई रिसर्च के मुताबिक़ जब औरतों में ओएस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन रिलीज़ होते हैं तभी उनके दिमाग़ के दोनों हिस्से ज़्यादा तेज़ी से काम करते हैं। इससे महिलाओं की सोचने की क्षमता में लचीलापन आता है। और दिमाग़ का दायां हिस्सा तेज़ गति से काम करने लगता है। देखा गया है कि जिन लोगों के दिमाग़ का दायां हिस्सा ज़्यादा काम करता है वो गणित के प्रश्न तेज़ी से हल कर लेते हैं। शरीर में हर महीने होने वाले बदलाव से दिमाग़ के काम करने के तरीक़े पर असर पड़ता है। महिलाओं में ये बदलाव पॉज़िटिव होते हैं।

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