शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई थी धांधली, नया रिजल्ट घोषित

इलाहाबाद. ऐसा पहली बार हुआ है कि धांधली करने वालों को रंगेहाथ पकड़ लिया गया, लेकिन कार्रवाई किसी पर भी नहीं हुई है। केवल अधिकारियों के तबादले कर उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।

मामला 68500 सहायक शिक्षकों भर्ती का है। इस परीक्षा में रिजल्ट आने के बाद काफी बवाल हुआ था। जो लोग परीक्षा नहीं दिए थे, उन्हें भी पास कर दिया गया था। इसके बाद सरकार जागी थी और जांच के आदेश दिए थे।

एग्जिमिनेशन रेगुलटरी आथारिटी ने पाया है कि 4688 छात्रों को फेल किया गया था, जबकि वे पास थे। इन छात्रों की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन के बाद उन्हें दोबारा पास किया गया है।

पुनर्मूल्यांकन के दौरान कॉपी चेकिंग में काफी गड़बड़ी पाए जाने का पता चला है। हालांकि इसका गुनहगार कौन है, इस पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। इस मामले पर सीबीआई जांच में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इससे राज्य सरकार को काफी राहत मिली थी।

Examination Regulatory Authority ने उत्तर प्रदेश सहायक शिक्षक परीक्षा का पुनर्मूल्यांकन रिजल्ट घोषित कर दिया है।

जो आवेदक अपना रिजल्ट देखना चाहते हैं तो वो UP Basic Education Board की वेबसाइट btcexam.in पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।

आपको बता दें कि फाइनल रिजल्ट आने के बाद करीब 30,852 अभ्यर्थियों ने पुर्नमूल्यांकन के लिए अप्लाई किया था। अगस्त 2018 में यह रिजल्ट घोषित किया गया था जिसमें 41556 अभ्यर्थियों को पास किया गया था।

कोर्ट में सरकार को कैसे मिली राहत

हाईकोर्ट (High Court) की लखनऊ (Lucknow) पीठ ने राज्य सरकार को बड़ी राहत दी थी। न्यायालय ने 68,500 पदों पर सहायक शिक्षक भर्ती में कथित गड़बड़ी की सीबीआई (CBI) जांच के एकल पीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके साथ ही न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले में दर्ज एफआईआर पर फिलहाल कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया था।

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर व न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल विशेष अपील पर दिया। सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने दलील दी कि भर्ती प्रकिया पारदर्शी व निष्कलंक है। इसमें किसी प्रकार का आपराधिक साजिश नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि एकल पीठ ने अपने आदेश में बिना किसी साक्ष्य के भर्ती में भ्रष्टाचार होना करार दे दिया, जो कि उचित नहीं था। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ अभ्यर्थियों के मामले में परीक्षकों से गलती हो गई थी, जिसे ठीक कर लिया गया था। इसके बाद सीबीआई जांच का कोई औचित्य नहीं था।

Check Also

गठबंधन

माया-अखिलेश इस दिन से शुरु करेंगे चुनाव प्रचार, जानें कहां होगी पहली रैली

लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर SP-BSP ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। समाजवादी ...