Tag Archives: 2 जुलाई 1997

अखिलेश और मुलायम का 13 प्वाइंट रोस्टर से है गहरा नाता, पूरा पढ़िए

लखनऊ. खबर की शुरुआत एक शेर से करते हैं। ये पंक्तियां जनाब मुज़फ्फर रज़मी की हैं, 1974 में आल इंडिया रेडियो से ब्राडकास्ट हुआ, तो मुल्क भर में आम फेम शेर बन गया। ये लाइन है लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई ! महरूम-ऐ-हकीक़त है साहिल के तमाशाई ! हम डूब के समझे है दरिया की गहराई ...

Read More »