समीकरणः श्रावस्ती से सपा के जिताऊं प्रत्याशी हो सकते हैं शिव प्रताप यादव!

अखिलेश कृष्ण मोहन

लखनऊ. लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट सभी पार्टियां तैयार कर रही हैं। फर्क इंडिया हर रविवार को एक लोकसभा क्षेत्र के रिपोर्ट को प्रकाशित करेगा। 80 लोकसभा क्षेत्र के समीकरण को समझने के लिए विधानसभावार स्थानीय लोगों की रिपोर्ट और मौके पर लोगों से बातकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इस कड़ी में पेश है इस बार श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र की रिपोर्ट।

1- श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र कुल 5 विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर बना है। ये हैं बलरामपुर के तुलसीपुर और गैंसड़ी। जनपद श्रावस्ती में श्रावस्ती और भिनगा विधानसभा सीट। श्रावस्ती को पिछड़ी जाति बाहुल्य सीट माना जाता है। यहां पर हमेशा मुस्लिम प्रत्याशी होने पर हिन्दू बनाम मुस्लिम कर दूसरी पार्टियां चुनाव जीत लेती हैं। यही वजह है कि समाजवादी सरकार में मंत्री रहे डॉ. शिव प्रताप यादव यहां से लोकसभा चुनाव का टिकट भी मांगते रहे हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत है। साफ सुथरी छवि होने की वजह से वह श्रावस्ती लोकसभा के नंबर वन उम्मीदवार हैं। शिव प्रताप यादव करीब 1980 से राजनीति कर रहे हैं।

2- वर्तमान में श्रावस्ती में जो माहौल है वह कुछ इस तरह है। यहां से सपा या बसपा जो भी मुस्लिम प्रत्याशी उतरेंगे उसके खिलाफ भाजपा हिन्दू प्रत्याशी उतार कर जनसमर्थन हाशिल करने की कोशिश करेगी। स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में रुबाब सईदा को टिकट मिला था। रुबाब पूर्व मंत्री डॉ. वकार अहमद शाह की पत्नी हैं। इसके बाद वर्ष 2014 में अतीक अहमद को समाजवादी पार्टी ने लोकसभा का प्रत्याशी बनाया था। दोनों ही बार समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। सूत्रों की माने तो मुस्लिम प्रत्याशी होने की वजह से शरारती लोग इसे सांप्रदायिक रंग दे देते हैं। शिव प्रताप यादव ऐसे नेता हैं जिनकी हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोगों में बराबर पैठ रही है। इस लिहाज से भी शिव प्रताप का पलड़ा सबसे भारी माना जा रहा है।

3- ग्राउंड रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि यहां से वर्ष 1998 और 1999 में समाजवादी पार्टी ने लोकसभा सीट जीती थी, तब सपा के प्रत्याशी रिजवान जहीर थे, लेकिन इसके लिए बड़ा फैक्टर उतरौला और शाहदुल्ला नगर रहा। उस समय श्रावस्ती लोकसभा सीट नहीं थी। बलरामपुर लोकसभा सीट से ही रिजवान जहीर चुनाव जीते थे। इसके बाद उतरौला और शाहदुल्ला नगर के कटकर गोंडा में चले जाने से और श्रावस्ती अलग लोकसभा बन जाने से समीकरण पूरी तरह बदल गया। यहां पर हर बार चुनाव में हिन्दू बना मुस्लिम कर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस चुनाव जीतते रहे हैं। वर्ष 2009 में यहां से कांग्रेस के विनय कुमार पांडे चुनाव जीते थे। इसके बाद वर्ष 2014 में दद्दन मिश्रा चुनाव जीत गए। वर्ष 2004 में जब यह बलरामपुर लोकसभा सीट थी उस समय समाजवादी पार्टी के टिकट पर बृजभूषण शरण सिंह चुनाव जीते थे।

4- वर्ष 2004 में नया लोकसभा श्रावस्ती बनने से यहां का समीकरण पूरी तरह बदल गया। पूर्व मंत्री शिव प्रताप यादव की यहां के गैसड़ी विधानसभा में ही नहीं, बल्कि आस पास के इलाकों में भी अच्छी पकड़ है। वह वर्ष 2009 और 2014 दोनों ही लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से टिकट मांगते रहे हैं। हालांकि टिकट नहीं मिलने के बाद भी उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार को जिताने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह नाकाम रहे। इसका दुख उन्हें आज भी है। पार्टी को जमीन पर मजबूत करने में जुटे शिव प्रताप यादव फर्क इंडिया से कहते हैं कि वह हमेशा जमीन पर काम करते रहे हैं। कार्यकर्ता और जनता ही उनके लिए सबकुछ हैं। वह अखिलेश यादव के सपने को साकार कर रहे हैं।

5- शिव प्रताप यादव 3 बार विधायक और 2 बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हैं। वह एमएल कॉलेज बलरामपुर में करीब 33 वर्ष तक प्रोफेसर भी रह चुके हैं। किसानों के बीच उनके मुद्दों पर काम करने के लिए जा भी जाने जाने वाले शिव प्रताप यादव ने पिछले 60 दिनों में 25 से अधिक जनसभाएं कर आम लोगों के बीच बने हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी के लिए शिव प्रताप यादव एक चुनौती के रुप में दिखाई पड़ रहे हैं।

6- शिव प्रताप यादव गैसड़ी से विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं, जबकि यह मुस्लिम बहुल्य क्षेत्र है। उनका यहां से चुनाव जीतना भी यह साबित करता है कि वहां मुसलमानों के बीच उनकी अच्छी पैठ है। इसके साथ ही पिछले दो साल में गन्ना किसानों के लिए तीन बड़ा आंदोलन करने का काम भी शिव प्रताप यादव ने किया है। श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र में करीब 52 फीसदी ओबीसी और 15 फीसदी दलित आबादी है। यही वजह है कि यहां पर ओबीसी और दलित आबादी ही चुनाव जीतने के लिए बड़ा फैक्टर रहा है।

7- भारतीय जनता पार्टी के एक स्थानीय नेता ने अपने ऊपर कार्रवाई होने के डर से नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिव प्रताप जब मंत्री थे, उस समय वह इलाके के लोगों के लिए भगवान की तरह थे, यही वजह है कि आज भी जनता उनको भुला नहीं पा रही है। यदि सपा-बसपा गठबंधन से शिव प्रताप यादव को टिकट मिला तो वह भाजपा को हराने का दम रखते हैं। वह यहां पर सबसे मजबूत नेता हैं। उनके ऊपर किसी भी तरह का दाग नहीं है। वह जनता के नेता हैं। बेहद सरल और हर समय उपलब्ध रहते हैं।

फोटोः स्थानीय बैठक करते हुए पूर्व मंत्री शिव प्रताप यादव।

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