अखिलेश यादव की इस गलती से कमजोर हो जाएगी सपा !

अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया कुछ ऐसा, मीडिया देखकर हो गई हैरान !लखनऊ. अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा से चुनावी गठबंधन कर एक बड़ा दाव खेला है। निश्चित रूप से इस दिशा में बढ़ने पर दोनों ही दलों को फायदा हो सकता था। अधिक सीटें आ सकती थीं, लेकिन दोनों ही दलों का स्वरूप बिलकुल अलग है। और दोनों ही दलों ने जिस तरह से पार्टी के नेताओं को विश्वास में लिए बिना सीटों का बंटवारा किया वह सपा के लिए ज्यादा खतरनाक है। क्योंकि बसपा के नेता तो इस डिक्टेटरशिप को नहीं समझ पाएंगे, लेकिन सपा के लोगों में अभी से बगावत शुरू हो गई है।

क्यों है नेताओं में असंतोष

सवाल ये है कि नेताओं में असंतोष क्यों है ? जो नेता पांच साल से लोकसभा लड़ने की तैयारी कर रहा था। उससे बिना बात किए, उसे विश्वास में लिए बिना, आपने उस लोकसभा सीट को दूसरी पार्टी के समझौते में डाल दिया। आज भी आप असंतुष्ट लोगों से बात नहीं करना चाहते हैं। यही वजह है लोगों में भारी गुस्सा है। इस गुस्से का खामियाजा भी अखिलेश यादव को उठाना पड़ सकता है। अखिलेश यादव में एक भ्रम की स्थिति ये है कि वह केवल युवा नेताओं को ही नेता मानते हैं। जबकि बड़े और अनुभवी नेताओं को दरकिनार करना हमेशा नुकसानदायक होता है।

क्या करना चाहिए था

कायदे से माने तो सबसे पहले अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के सभी जिला अध्यक्ष, पूर्व सांसद और बड़े नेताओं को बुलाकर स्थिति से अवगत करवाना चाहिए था। उन्हें विश्वास में लिया जाना चाहिए था। इसके लिए उनसे समर्थन भी मांगा जाना चाहिए था। इसके बाद यदि सीटों की घोषणा होती तो निश्चित रूप से इस तरह से नाराजगी नहीं होती।

अखिलेश यादव के करीबी और पूर्व मंत्री कहते हैं कि स्थिति कंट्रोल से बाहर है। अखिलेश यादव पूरी तरह से अवसाद में हैं। वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या हो रहा है। उनके हर फैसले टपोरी टाइप के नेता कर रहे हैं। बड़े नेताओं से अखिलेश यादव बात ज्यादा नहीं करना चाहते हैं। अखिलेश यादव को राजेंद्र चौधरी और एसआरएस यादव टाइप के नेता ही पसंद हैं, जो ऑफिस छाप से अलग कुछ भी नहीं है। राजेंद्र चौधरी तो आज भी विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकते। वह अखिलेश यादव को स्थिति से अवगत क्या करवाएंगे। ये नेता केवल अपने आप को अखिलेश यादव के आस पास रखना चाहते हैं। जिससे यदि भविष्य में कहीं अखिलेश यादव की सरकार आ जाए तो वह फिर से मंत्री बन जाएं।

संतकबीर नगर से लेकर कई लोकसभा क्षेत्र में असंतोष है

सूत्र बताते हैं कि संतकबीर नगर से भालचंद्र यादव समेत कई लोकसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के नेताओं में भारी असंतोष है। नेताओं का कहना है कि पार्टी ने उनसे बात तक नहीं की। वह कैसे मान लें कि अखिलेश यादव उनके नेता हैं। अखिलेश यादव तो हाईकमान बनकर पार्टी को चलाना चाहते हैं।

 

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