आम आदमी के जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे ओम शंकर की ओर पीएम ने देखा तक नहीं !

मुख्यालय संवाददाता

वाराणसी/लखनऊ. स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गांव देहात में रहने वाले लोग हर दिन अकाल मौत के मुंह में समा जाते हैं। उनके लिए न बीमा है और न इलाज की व्यवस्था। हाशिए के इस तबके की जिंदगी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे बीएचयू के कॉर्डियोलाजिस्ट डॉ. ओम शंकर एक एम्स बनवाए जाने की मांग कर रहे हैं। डॉ. ओम शंकर की मांग है कि बीएचयू से अलग एक एम्स बनाया जाए, क्योंकि बीएचयू पूरा बोझ नहीं उठा पा रहा है। गरीबों को इलाज नहीं मिल रहा है। इस मांग को लेकर डॉ. ओम शंकर पिछले 3 दिन से अनशन कर रहे हैं। हजारों-लाखों लोग ओम शंकर के साथ है, लेकिन केंद्र सरकार इसे अनसुना कर रही है।

हाल ही में दो दिन पहले ओम शंकर ने अनशन शुरू किया तो ये उम्मीद जगी कि वाराणसी में हो रहे प्रवासी दिवस समारोह में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आएंगे, तो उनकी नजर भी इस मुद्दे पर पड़ेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने हजारों लाखों करोड़ रुपए की घोषणाएं की, लेकिन एम्स की घोषणा करने से बचे, जबकि अप्रवासी भारतीय और अन्य लोग ओम शंकर की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। विदेशी नागरिकों पर इसका प्रभाव पड़ा है।

पूर्वांचल के करीब दो दर्जन स्वंयसेवी संस्थाओं और राजनीतिक दलों ने भी डॉ. ओम शंकर की मुहिम का समर्थन किया है। आम आदमी पार्टी ने भी खुलकर ओम शंकर का साथ देने की अपील की है। उधर, गांव-देहात से भी ये आवाज उठने लगी है कि स्वास्थ्य का मुद्दा आम आदमी का है। इसे सरकार को दरकिनार नहीं करना चाहिए। समान स्वास्थ्य के अधिकार की बात करने वाले ओम शंकर का कहना है कि बीमारी से सबसे ज्यादा गरीब आदमी मरता है। अमीर आदमी और पैसे वाला तो निजी अस्पताल और दिल्ली-मुंबई इलाज करवा लेता है, ऐसे में ये लड़ाई आम आदमी के जिंदगी की है। आम आदमी की लड़ाई को हर किसी को लड़ना होगा। जब आप बीमार होंगे तब अब इसे नहीं लड़ सकते, ऐसे में एम्स हर इंसान की जरूरत है।

यादव सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कहते हैं कि यह दुर्भाग्य है कि जिनकी लड़ाई ओम शंकर लड़ रहे हैं, उसे ही पता नहीं है। सरकार इस लिए एम्स नहीं बनवाना चाहती है, क्योंकि इससे बीएचयू में निजी अस्पतालों की कमर टूट जाएगी। निजी अस्पतालों के जाल में सरकार फंसी हुई है। यदि ऐसा नहीं होता तो एम्स बहुत पहले ही बन गया होता। प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी आए थे, ऐसे में ओम शंकर से उन्हें मिलना चाहिए था। पीएम ने डॉ. ओम शंकर की लड़ाई को नजर अंदाज कर दिया। प्रधानमंत्री नहीं चाहते कि वाराणसी में एम्स बने। क्योंकि मोदी को अब वाराणसी से चुनाव लड़ना भी नहीं है।

फोटोः अनशन कर रहे डॉ. ओम शंकर (बाएं।)

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