पुरस्कारों पर सवाल न उठाए कांग्रेस इस लिए प्रणब को भी मिला भारत रत्न

नई दिल्ली. राष्ट्रपति ने तीन ब्राह्मण विभूतियों को ही भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की है। इसमें आरएसएस से प्रगाढ़ संबंध रखने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी, भूपेन हजारिका और आरएसएस के नेता नानाजी देशमुख हैं। पुरस्कारों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या भारत रत्न पुरस्कार राजनीति से प्रभावित होते हैं। सवाल यहां तक किया जा रहा है कि भारत रत्न दिए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन रणनीतियों पर काम किया। कहा जा रहा है कि कांशीराम का नाम भारत रत्न की लिस्ट में पहले था, लेकिन बाद में काट दिया गया।

1- प्रणब मुखर्जी

कास्ट और पावर फैक्टर पर काम करते हुए राजनीति का सबसे मस्टर स्ट्रोक पीएम मोदी ने खेला है। प्रणब मुखर्जी को इस लिए भारत रत्न दिया गया, जिससे अन्य पुरस्कारों पर कांग्रेस सवाल न खड़ा कर सके। क्योंकि प्रणब मुखर्जी कांग्रेस के नेता रहे हैं। यदि राहुल गांधी सवाल करते हैं तो प्रणब मुखर्जी उनके सामने रोड़ा बनकर खड़े हो जाएंगे। ऐसे में कांग्रेस की बोलती बंद करने के लिए प्रणब मुखर्जी को सम्मान दिया गया।

2- नानाजी देशमुख

नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक, समाजसेवी और भारतीय जनसंघ के नेता थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कडोली नामक छोटे से कस्बे में 11 अक्टूबर 1916 को हुआ था। नानाजी बाल गंगाधर तिलक की राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर समाज सेवा के क्षेत्र में आए। इसके बाद संघ के सरसंघचालक डॉ. केवी हेडगेवार के संपर्क में आए और फिर संघ के विभिन्न प्रकल्पों के जरिए पूरा जीवन राष्ट्रसेवा में लगा दिया। मध्यप्रदेश का चित्रकूट उनकी कर्मभूमि बना। नानाजी का लगभग पूरा परिवार विदेश में रहता है।

3- भूपेन हजारिका

हजारिका गायक, गीतकार और संगीतकार थे। 1977 में उन्हें पद्मश्री, 2001 में पद्मभूषण, 2012 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। 1936 में उन्होंने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था। 1939 में उन्होंने इंद्रमलाटी फिल्म के लिए दो गाने गाए। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना “अग्निजुगोर फिरिंगोति’ लिखा था। हिंदी फिल्म रुदाली और दमन के उनके गीत बेहद लोकप्रिय रहे।

इन महापुरुषों को दिया जा सकता था भारत रत्न

भारत रत्न जिन महापुरुषों को दिया जा सकता था उनकी लिस्ट निम्नलिखित है।

1- मेजर ध्यानचंद (हॉकी जादूगर)
2- कांशीराम (सामाजिक न्याय के जनक)
3- कर्पुरी ठाकुर (कुशल राजनेता व सामाजिक चिंतक)
4- बीपी मंडल
5- पीटी ऊषा
6- एम करुणानिधि
7- राम नरेश यादव

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