आरक्षण का विरोध करने वाली भाजपा, अब सवर्णों को देगी आरक्षण !

लखनऊ. आरक्षण को लेकर वर्ष 2019 चुनाव के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने नया पासा फेंक दिया है। जो पार्टी आरक्षण को भीख और आरक्षण से आए नौकरी में आए लोगों को दोयम दर्जे का नागरिक बताती रही है, वह अब सवर्णों को आरक्षण दे रही है। सवाल ये भी है कि क्या भाजपा का लोकसभा चुनाव को देखते हुए मापदंड बदल गया है। क्या यह आरक्षण कोर्ट में टिक पाएगा।

सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण क्यों

केंद्र सरकार का तर्क है कि 10 फीसदी आरक्षण गरीब सवर्णों को मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में बदलाव आएगा। उनकी नौकरियों और गरीबी के हालात में स्थिति सुधरेगी। इससे साफ है कि आरक्षण को सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से हटाकर अब इसे आर्थिक बनाया जा रहा है। जबकि आरक्षण का आधार संविधान में आर्थिक कभी नहीं रहा है।

…तो क्या संविधान बदलने की है तैयारी

आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन से हटकर आर्थिक करने का मतलब है कि संविधान को बदलना पड़ेगा। यानी संशोधन करने बाद ही ऐसा हो सकता है कि सवर्णों को आरक्षण दिया जाए।

जाट और मराठा आंदोलन का क्या होगा

सबसे बड़ा सवाल ये है कि यदि सवर्ण आरक्षण को इस तरह आनन-फानन में दिया जा सकता है तो कई दशक से लड़ रहे जाट और मराठाओं को आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया जा सकता है। सवाल ये भी है कि जो आरक्षण सवर्णों को दिया जा रहा है वह किसी कमेटी की संस्तुति या उसके सर्वे के आधार पर नहीं है, बल्कि यह आरक्षण केवल एक काल्पनिक नंबर को आधार बनाकर दिया जा रहा है।

एनडीए के घटक दल भी भ्रम में

हकीकत तो ये है कि सवर्णों को आरक्षण दिए जाने को लेकर जो दावा किया जा रहा है कि उसको लेकर अनुप्रिया पटेल (अपना दल स) और अन्य दलों से भी कोई बातचीत नहीं हुई है। सूत्रों की माने तो हर दल अपने हिसाब से अब रणनीति बना रहा है। हालांकि कहा ये जा रहा है कि कोई भी दल इस लिए इस मुद्दे का विरोध नहीं कर रहा है क्यों कि यह आरक्षण कोर्ट में टिक ही नहीं पाएगा। यह केवल चुनावी आरक्षण है।

फोटोः फाइल।

Check Also

भाजपा नेता ने लोकसभा चुनाव को लेकर लीक कर दी आयोग की ये जानकारी

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi)के गृह राज्य गुजरात में सत्तारूढ़ बीजेपी (BJP) ...