लालू मैनेजमेंट के चाणक्य हैं, विदेशी आते थे गुर सीखने, मीडिया ने बना दिया दागीः मनोज यादव

मनोज यादव, प्रदेश अध्यक्ष ,यादव सेना, दिल्ली

‘मुद्दों पर बात’

लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे तब चीन, जापान, रसिया, फ्रांस जैसे तमाम देशों के नेता और प्रशासनिक अधिकारी आये थे रेल प्रबंधन सीखने। ये लालू की सूझबूझ, ज्ञान और समझ की ही देन है।

जब लालू रेलमंत्री बने थे, जो रेलवे हजारों अरब के घाटे में चल रही थी, उसको उस घाटे से उबार कर अरबों रुपए के फायदे में लाये, ये उनका प्रबंधन कौशल था, ये उनकी समझ हैं, ये उनकी देशभक्ति का प्रमाण है। ये उनके ज्ञान और भारतीयता का प्रमाण है।

दूसरे पहलू पर आते है 1977 से एक घोटाला चल रहा था। बिहार के सरकारों में जब लालू मुख्यमंत्री बने बिहार के, तो उनको इस बात की भनक लगी और जांच कराए, चूंकि सरकार उनकी थी इसलिए आरोप उनपर स्वाभाविक भी था और हुआ भी वही, पर ध्यान देने वाली बात ये है कि क्या कोई चोर अपने ही चोरी की जांच कराएगा? स्वाभाविक है नहीं, कराएगा क्योंकि सरकार की छवि खराब होगी, पर लालू ने इन सब की परवाह की बगैर जांच करवाया और निष्पक्ष जांच करवाए।

निष्पक्षता का प्रमाण है, उनपर भी आरोप लगा। क्योंकि ये घोटाला कई पुरानी सरकारों के दौर से चल रहा था, ये तथ्य हैं। इस पूरे घोटाले में मुख्य आरोपी बिहार के लालू से पूर्व मुख्यमंत्री हैं, वो अब भी जेल में ही है, लालू सहआरोपी है। अब सामाजिक पहलू देखते है, क्योंकि लालू पिछड़ों के रहनुमा है, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यक की राजनीति करते हैं। इसलिए उन्हीं के बीच आप फिर उनकों गलत साबित करने की कोशिश हो रही है।

मज़े की बात ये है कि इसमें जो आरोपी है, उनका कोई संबंध नहीं है क्या 14 साल लड़का जो क्रिकेट खेल रहा है अपना कैरियर क्रिकेट में देख रहा है, उसको आरोपी बनाना सिर्फ इसलिए सही है क्यों कि एक पिछड़े का बेटा है और पिछड़े समाज से आता है। क्योंकि उनके पिता पिछड़ों की राजनीति करते हैं। यह आज के शासक वर्ग का एक बेहद घिनौना प्रयास है और प्रशासन का उसमे मूक सहभागी होना भी, हैरानी तो तब होती है, जब अखिल भारतीय पत्रकारिता जिसको संविधान के तीनों आयामों के बाद चौथे स्तम्भ का रूप दिया जाता है, वो भी उतनी ही सहभागिता दे रहे हैं।

पत्रकारिता का मूल स्वरुप सदैव विपक्ष का होना चाहिए पर भारत में स्थिति अलग है और जुदा भी पर सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण है, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी जब सरकार की भाषा बोलेगा, तो सरकार की नीतियों का सम्यक समालोचन कैसे होगा? लालू प्रसाद यादव अकेले नहीं है। आज उनके साथ पूरा देश खड़ा है। मैनेजमेंट के इस चाणक्य को खत्म कर भाजपा दलित-पिछड़ी जाति की राजनीति को मार डालना चाहती है। ऐसे में यह वह समय है, हमें एक नहीं 100 लालू पैदा करना होगा। लालू से प्रेरणा लेनी होगी। लालू की विचारधारा को फैलाना होगा। 

  • मुद्दों पर फिर कभी होगी बात…

  • मनोज यादव दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कॉलर हैं। वह यादव सेना के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, सियासी और सामयिक मुद्दों पर फर्क इंडिया में उनका कालम ‘मुद्दों पर बात’ हर शनिवार को प्रकाशित होता है।

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