उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अवैध हॉस्टलों पर कार्रवाई के लिए एमडीडीए को दिए आदेश, 22 से अधिक हॉस्टल सील

देहरादून में प्रेमनगर के केहरी गांव क्षेत्र के जिन तीन हॉस्टल को कैंट बोर्ड ने सील किया है, उनकी पैरवी से अब जिला प्रशासन ने हाथ खींच लिए हैं। जिलाधिकारी सी रविशंकर का कहना है कि कैंट बोर्ड क्षेत्र की स्थिति को लेकर अपने स्तर पर स्पष्ट करेगा। साथ ही साल 2016 में जो सर्वे किया गया था, उसका नक्शा तैयार कराने को लेकर भी कैंट बोर्ड अपने स्तर पर निर्णय लेगा। इससे पहले जिलाधिकारी ने ही हॉस्टलों की सील खोलने को लेकर कैंट बोर्ड से सहानुभूति पूर्वक कार्रवाई के लिए कहा था।

हाईकोर्ट ने अवैध हॉस्टलों पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए एमडीडीए को आदेश दिए हैं। एमडीडीए अब तक 22 से अधिक हॉस्टल सील कर चुका है। इसी आधार पर कैंट बोर्ड ने भी अपने क्षेत्र के तीन हॉस्टल सील कर दिए थे। इसके बाद हॉस्टल संचालकों ने सीलिंग पर आपत्ति जताते हुए यह कह दिया कि वह नगर निगम क्षेत्र में आते हैं। लिहाजा, कैंट बोर्ड उन्हें सील नहीं कर सकता।

इसका संज्ञान लेकर ही जिलाधिकारी ने कैंट बोर्ड को पत्र लिखा था। साथ ही सर्वे के लिए एक संयुक्त टीम भी गठित कर दी थी। हालांकि, कैंट बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया था कि साल 2016 में राष्ट्रपति शासन के दौरान अवैध निर्माण के एक मामले में संयुक्त सर्वे पहले ही किया जा चुका है। जिस पर बोर्ड ने दो से तीन लाख रुपये भी खर्च किए थे। सिर्फ सर्वे क्षेत्र का सर्वे ऑफ इंडिया से नक्शा तैयार किया जाना शेष है।

इसी बीच एक हॉस्टल संचालक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिस पर प्रशासन, कैंट बोर्ड और नगर निगम से जवाब मांगा गया है। इसके बाद अब जिलाधिकारी प्रकरण से हाथ खींच चुके हैं, जबकि कैंट बोर्ड स्तर से सर्वे क्षेत्र का नक्शा तैयार करने की कार्रवाई नहीं की जा रही। वहीं, नगर निगम ने भी बात कैंट बोर्ड पर डाल दी है। नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे का कहना है कि सर्वे आदि के रिकॉर्ड बोर्ड के ही पास हैं।

कैंट बोर्ड ही उलझा रहा मामला

वर्ष 2016 में किए गए सर्वे के रिकॉर्ड कैंट बोर्ड के पास हैं और इसी आधार पर हॉस्टलों को भी बोर्ड ने ही सील किया। अब मामले में विवाद बढ़ गया तो बोर्ड उसके उचित निस्तारण की दिशा में भी प्रशासन को सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा रहा। ना ही सर्वे के आधार पर नक्शा तैयार करने के लिए सर्वे ऑफ इंडिया को पत्र भेजा जा रहा है।

इसके साथ ही सीलिंग के बाद आगे की कार्रवाई जैसे ध्वस्तीकरण की तरफ भी प्रयास नहीं किए जा रहे। इस मामले में सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक का कहना है कि वर्ष 2016 में उनके स्तर पर ही विवादित स्थल का सर्वे किया गया था। नक्शा तैयार करने को लेकर उन्हें कोई पत्र नहीं भेजा गया है। यदि पत्र आता है तो नक्शा तैयार किया जाएगा।

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