दलित प्रोफेसर को सम्मान देने की घोषणा के बाद सरकार ने किया मना, जानिए वजह

लखनऊ. सबका साथ, सबका विकास होने का दावा करने वाली उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के अफसरों ने एक ऐसा कदम उठा लिया है, जिसकी चर्चा जोरों पर है। यहां तक कहा जा रहा है कि सरकार के अधिकारियों ने इस मुद्दे की गंभीरता को नहीं समझा है। सरकार ऐसे अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर सकती है। हालांकि अभी तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रोफेसर रविकांत को राज्य पोषित ”यूपी राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा डॉ. रविकांत को मिलने वाले ‘रमन लाल अग्रवाल पुरस्कार’ दिया जाना था। इसकी सूचना भी रविकांत को दे दी गई थी। इसके बाद पत्र जारी कर विभाग ने यह कहा है कि फेसबुक पर पोस्ट को भाजपा विरोधी देखते हुए आपको पुरस्कार न देने का निर्णय लिया गया है। यानी रविकांत का पुरस्कार रद किया जाता है।

राकांपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने तमाम लोगों के साथ बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर प्रतिमा शाम 5 बजे से छह बजे तक एक घंटे धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रोफेसर रविकांत समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे। डॉ. दीक्षित का कहना है कि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. रविकांत का अवार्ड कैंसिल करना, योगी सरकार का तानाशाही भरा फैंसला है। डॉ. रविकांत को दलित होने के का मिला दण्ड मिला है। डॉ. रविकांत का अवार्ड कैंसिल प्रदेश सरकार का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला है। कितनी दलित हितैषी योगी सरकार, इसका ताजा उदहारण डॉ. रविकांत का अवार्ड कैंसिल करना है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने लखनऊ विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. रविकांत को मिलने वाला अवार्ड को राज्य सरकार द्वारा कैंसिल किये जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है ।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हाफिज गांधी ने कहा है कि यह लोकतंत्र पर हमला है। पुरस्कार देने में पूरी तरह से भेदभाव हो रहा है। यह प्रकरण इस बात का सबूत है। केवल भाजपा की वाहवाही शोसल मीडिया पर लिखने वालों को ही पुरस्कार दिए जा रहे हैं।

बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर प्रतिमा पर धरना प्रदर्शन में विश्वविद्यालत से जुड़े शिक्षक, छात्र, रंगकर्मी और कई संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए।

Posted by Akhilesh Krishna Mohan on Sunday, March 10, 2019

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