दलितों का वोट लेने के लिए अखिलेश यादव को देने होंगे इन 9 सवालों के जवाब

REPORT: MAHESH GAUTAM

लखनऊ. मैदान में अधिकारियों को क्रिकेट मैच हराकर पुरस्कार लेने वाले अखिलेश यादव का असली मैच अब शुरू हुआ है। सियासत के इस मैच में आपने टीम का सलेक्शन भले ही अच्छा कर लिया है, लेकिन यदि आपकी अंडरस्टैंडिंग हवा के रुख और क्रिकेट की पिच से अच्छी नहीं है, तो यह ठीक नहीं है। ऐसे ही कुछ सवाल आजके सियासी माहौल में तैर रहे हैं। चाय की दुकानों से गांव के चौराहों पर हो रहे इन सवालों को फर्क इंडिया आपके सामने रख रहा है।

सवाल नंबर-01

13 प्वाइंट रोस्टर पर खुलकर विरोध कर रही समाजवादी पार्टी ने कभी भी इस मुद्दे पर अपनी गलती नहीं मानी। उत्तर प्रदेश में 13 प्वाइंट रोस्टर लागू करने वाले अखिलेश यादव सत्ता में आएंगे तो क्या इसे खत्म करेंगे या नहीं ?

सवाल नंबर-02

वर्ष-2012 में सत्ता में आने के बाद सबसे पहले अखिलेश यादव ने दलितों का ठेके में आरक्षण खत्म किया था। क्या ये उनकी बड़ी भूल थी। यदि थी तो अब दलितों का वोट उन्हें लेना है, उन्हें खुलकर माफी मांगनी चाहिए। उनके माफी मांगने से उनकी पार्टी का स्टैंड भी क्लीयर होगा और दलित उनके साथ जुड़ेगा भी।

सवाल नंबर-03

गठबंधन त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था को लेकर क्या राय रखता है। अखिलेश यादव सरकार में आरक्षण की मांग कर रहे अभ्यर्थियों को पुलिस ने पीटा था। सरकार इस मामले में अपना पक्ष नहीं रख पाई थी। अखिलेश यादव की इस मुद्दे पर क्या राय है।

सवाल नंबर-04

प्रोन्नति पाए अधिकारियों और कर्मचारियों को बिना देर किए रिवर्ट किया गया। मामले का विकल्प खोजा जाना चाहिए था। एसडीएम तहसीलदार बन गया। दारोगा कांस्टेबल बन गया। चीफ इंजीनियर अधिशासी अभियंता बन गया। क्लास 3 का कर्मचारी सफाई कर्मचारी बन गया। यह एक बड़ी गलती थी। ये गलती थी या नहीं, इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को अपना नजरिया साफ करना चाहिए।

सवाल नंबर-05

देश की आजादी के बाद से पट्टे की जमीनों में दलितों को अनिवार्यता मिल रही थी, इसे अखिलेश यादव की सरकार ने खत्म कर दिया। यदि सपा और बसपा साथ-साथ हैं, तो फिर से पुराने नियम को बहाल करेंगे। अखिलेश यादव को इस पर स्टैंड क्लीयर करना चाहिए।

सवाल नंबर-06

कांशीराम, आंबेडकर और शाहू जी महाराज के नाम से बनी संस्थाओं के नाम बदल दिए गए। ये बहुजन नायक हैं। ये काम अखिलेश यादव की सरकार में हुआ। ऐसा नहीं होना चाहिए था।

सवाल नंबर-07

अखिलेश यादव ने दलित साहित्यकारों को यशभारती पुरस्कार नहीं दिए। दलितों के लिए पुरस्कार अछूत हो गए थे। ये एक बड़ी गलती थी। इस मुद्दे पर भी अखिलेश यादव को अब अपना नजरिया बदलाना होगा। हाशिए का समाज पुरस्कार के योग्य नहीं है, इस नकारात्मक सोच से बाहर आना होगा। अखिलेश यादव को इस मुद्दे पर भी अपना स्टैंड क्लीयर करना होगा।

सवाल नंबर-08

सपा और बसपा का गठबंधन केवल सत्ता प्राप्ति का साधन न बनकर रह जाए। यदि सत्ता में आते हैं तो सामाजिक न्याय के काम भी करें। क्योंकि यदि ऐसा नहीं होगा, तो फिर गठबंधन टूटेगा और दोनों ओर तीर कमान तन जाएंगे। सामाजिक न्याय को लेकर भी अखिलेश यादव को अपने स्टैंड क्लीयर करने होंगे।

सवाल नंबर-09

अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी से किसी दलित को एमएलसी और राज्यसभा नहीं भेजा। भविष्य में इसमें सुधार करेंगे। दलितों और पिछड़ों का वोट लेकर प्रमोद तिवारी जैसे लोगों को राज्यसभा भेजने का काम नहीं करेंगे।

फोटोः फाइल।

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