बैकलिंक क्या है? वेबसाइट को गूगल टॉप-10 में लाने या ट्रैफिक बढ़ाने का आसान तरीका…!

किसी भी ब्लाॅग या वेबसाइट को गूगल सर्च में लाने के लिए SEO यानी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन की ज़रूरत पड़ती है। इसईओ के साथ ही जो दूसरी बड़ी जरूरत होती है वो है Backlinks…. बैकलिंक एसईओ से अलग होता है लेकिन किसी भी वेबसाइट को गूगल सर्च के टाॅप टेन में लाने के लिए एसईओ से ज़्यादा मद्द करता है। किसी वेबसाइट की जितनी ज्यादा बैकलिंक्स बनी होगी उस पर उतनी ज्यादा ट्राफिक यानी यूजर्स आयेंगे। यह होगा कैसे? जानने के लिए पढ़ते रहिये!

बैकलिंक क्या है? संक्षिप्त विवरण:-
अगर आप यह लेख पड़ रहे हैं तो अवश्य ही आपको बैकलिंक का थोड़ा बहुत ज्ञान तो होगा ही। एक छोटे से संक्षेप विवरण में अगर बैकलिंक्स के बारे में बताया जाये तो यह किसी भी वेबसाइट या ब्लाॅग के किसी भी आर्टिकल का लिंक होता होता है जिसे डू-फाॅलो लिंक की तरह किसी दूसरी वेबसाइट या ब्लाॅग में लगाया जाता है। उदाहरण के तौर पर न्यूज़ रीडर्स का डू फाॅलो लिंक Download Free Apps पर लगा है।

ऐसा करने से गूगल लिंक की गई वेबसाइट को विश्वसनीय वेबसाइट की लिस्ट में शामिल करता है और इससे ब्लाॅगर या वेबसाइट को गूगल सर्च के टाॅप टेन में आने का मौका मिलता है। लेकिन यह करना इतना आसान नहीं है जितना लगता है। बहुत सारे फ्राॅड और धोखेबाज वेबसाइट डेवेलाॅपर हजारों फ्री बैकलिंक्स बनाने के नाम पर आपका घंटों समय और इंटरनेट डेटा बर्बाद कर देते हैं और आपको कुछ नहीं मिलता है। ऐसे वेबसाइट डेवेलाॅपर आपको कुछ न देकर खुद एड से आपके जरिये हजारों डाॅलर कमा लेते हैं। ऐसे धोखेबाजों से कैसे बचा जाये? इसके बारे में नीचे संक्षेप से लिखा है!

बैकलिंक कैसे बनाये?

बैकलिंक्स बनाने के कई तरीके है जिनमें से कुछ मुफ्त और कुछ पेड हैं. इसके आलावा दूसरी वेबसाइट के साथ बैकलिंक्स एक्सचेंज करके भी बैकलिंक बनाई जा सकती है.

फ्री बैकलिंक्स : इंटरनेट पर बहुत सी ऐसी वेबसाइट और ब्लॉग उपस्थित हैं जहां विजिट करके नीचे दिए कमेंट में अपनी वेबसाइट का लिंक डालकर बैकलिंक्स बनाई जा सकती है. लेकिन इस तरह की बैकलिंक्स ज़्यादा काम की नहीं होती हैं. हाँ, अगर किसी अच्छी खासी ट्रैफिक वाली वेबसाइट पर यह तरीका आज़माया जाये तो उस वेबसाइट से कुछ ट्रैफिक ज़रूर मिल सकता है. इसके साथ ही बहुत सी वेबसाइट फ्री गेस्ट पोस्ट करने का ऑफर भी देती हैं जिनमें यदि अपना कोई वैल्युएबल आर्टिकल लिख कर लिंक के साथ पोस्ट किया जाए तो वो एक बेहतर बैकलिंक साबित हो सकती है.

पेड बैकलिंक्स : इस तरह की बैकलिंक्स इंटरनेट पर किसी भी बैकलिंक प्रोवाइडर से खरीदी जा सकती है. हालाँकि इस मामले में इंटरनेट पर धोखाधड़ी भी बहुत होती है. लेकिन fiver.com जैसी कुछ वेबसाइट हैं जहाँ भरोसेमंद बैकलिंक प्रोवाइडर मिलते हैं. यहाँ किसी भी बैकलिंक प्रोवाइडर का फीडबैक चेक करके उससे बैकलिंक खरीदी जा सकती है. इसके आलावा इंटरनेट पर बहुत से ऐसे भी बैकलिंक प्रोवाइडर मिलते हैं जो पेड पोस्ट के साथ किसी भी वेबसाइट का लिंक लगाते हैं.

बैकलिंक एक्सचेंज : यह बैकलिंक बनाने का एक निज़ी तरीका है जहाँ किसी जान-पहचान के व्यक्ति से निज़ी तौर पर संपर्क करके उसकी वेबसाइट पर अपना कोई लिंक के साथ आर्टिकल लगा सकते हैं. इसके बदले में उन्हें भी इसी तरह का ऑफर दे सकते हैं. इस प्रक्रिया को बैकलिंक एक्सचेंज कहते हैं.

फ्री बैकलिंक्स बनाने के नाम पर हो रहे फ्राॅड से सावधान!
अपनी वेबसाई की रैंककिंग बनाने के लिए बहुत से ब्लाॅगर या वेबसाइट संचालक गूगल पर फ्री बैकलिंक्स सर्च करते हैं और उन्हें सैकड़ों ऐसी वेबसाइट मिल जाती है जो हज़ारों फ्री बैकलिंक्स बनाने का दावा करती है। जब आप उन वेबसाइट्स पर जाते हैं और अपनी वेबसाइट का यूआरएल इंटर करते हैं तो वो बैकलिंक्स बनाने का प्रोसेस शुरू कर देती हैं और यह सब ड्रामा घंटों तक चलता रहता है। कई घंटे और इंटरनेट डाॅटा बर्बाद करने के बाद जब आप अपनी वेबसाइट का बैकलिंक्स चेक करते हैं तो आपको पता चलता है कि उन हज़ारों बैकलिंक्स में से एक भी बैकलिंक आपकी वेबसाइट के लिए नहीं बनी।

यकीन मानिये, मैने भी अपना कई दिनों तक घंटो समय इसी में बर्बाद किया है। दरअसल, इस तरह के सभी धोखेबाज वेबसाइट डेवेलाॅपर आपको अपने वेबसाइट पर धोखे से ले आते हैं और फ्री बैकलिंक्स बनाने के नाम पर आपको घंटों अपनी वेबसाइट पर बना कर रखते हैं जिससे की वो अपनी वेबसाइट पर लगे एड से हजारों डाॅलर बना सकें। आप ऐसे धोखेबाजों के चक्कर में पड़कर अपना समय और इंटरनेट डेटा बर्बाद कर देते हैं और मिलता कुछ भी नहीं।

ऐसी वेबसाइट्स पर वायरस अटैक और आपका कंप्यूटर व लैपटाॅप हैक होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इसलिए गलती से भी कभी ऐसी किसी वेबसाइट को न खोलें जो फ्री की हजारों बैकलिंक्स बनाने का दावा करे। यह सभी धोखेबाज हैं। अब बात आती है कि विश्वसनीय तरीके से और डू-फाॅलो लाइफटाइम बैकलिंक्स कैसे बनायें? तो पढ़ते रहिये आगे का आर्टिकल!

Source – News Readers

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