भाजपा के राज में संविधान को खूंटे पर टांगने का काम हो रहा हैः डॉ. दीक्षित

लखनऊ. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एनकाउंटर के बाबत दिए गए बयान की कड़ी भर्सना की है और उनके बयान को शर्मनाक और लोकतंत्र और संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ एक छुटभैय्ये नेता की भड़ास करार दिया ।

राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमेश दीक्षित ने पुलिस वीक पर दिए गए योगी के बयान को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि यह देश संविधान से चलता है और हमारा संविधान हर नागरिक, उसके मानवाधिकारों को गारंटी देने की बात करता है, चाहे वो आरोपी ही क्यों न हो।

उन्होंने आगे कहा कि पुलिस को कोई अधिकार नहीं है कि वो किसी को भी आरोपी मान कर उसका एनकाउंटर कर दे, संविधान और कानून उनको इसकी इजाजत नहीं देता है। डॉ. रमेश दीक्षित ने आगे कहा की किसी पर आरोप तय करने और सजा देने के लिए न्यायपालिका है। उन्होंने योगी को सलाह देते हुए कहा कि वह यह ना भूले कि की देश में अभी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था है, जिस व्यवस्था के तहत वो मुख्यमंत्री बने है, वो लोकतान्त्रिक संवैधानिक व्यवस्था है, जो हर नागरिक को चाहे वो आरोपी ही क्यों न हो, को उसके मानवाधिकारों की गारेंटी करता है ।

डॉ. रमेश दीक्षित ने आगे कहा कि सजा देने का अधिकार न्यायपालिका को है न कि योगी, उनकी गुंडा वाहिनी या पुलिस को है, पुलिस नहीं तय करेगी किसको क्या सजा दी जाये । डॉ. दीक्षित ने कहा कि योगी सरकार में योगी सहित केशव मौर्या समेत तमाम मंत्रियों पर संगीन आरोप और केस कोर्ट में लंबित पड़े हैं। योगी को सबसे पहले अपनी गौ गुंडा वाहिनी पर रोक लगनी चाहिए ।

डॉ. रमेश दीक्षित ने आगे कहा कि संविधान हर नागरिक को कोर्ट में अपनी निर्दोषता सिद्ध करने का अधिकार देती है । कोर्ट ही अपराध को तय करेगी । पुलिस का काम संदेह में किसी को गिरफ्तार करके न्यायालय भेजने का ही है ।

उन्होंने आगे कहा कि योगी को आगाह करते हुए कहा कि अभी भी देश में कानून का शासन है , देश में अभी भी संवैधानिक व्यवस्था कायम है और लोकतंत्र जिंदा है । योगी सहित भाजपा को अभी भी इतना जनादेश नहीं मिला था कि वो देश की संवैधानिक व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दें । यह भाषा किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देती है ।

डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि राज्य का काम है की वो अपने हर नागरिक के मानवाधिकारों को सुरक्षित रखने की गारंटी करे। शासन की किसी भी संस्था को किसी भी भी नागरिक के मानवाधिकार को अतिक्रमण करने का कोई भी अधिकार हमारा संविधान नहीं देता है।

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