आज है कार्तिक पूर्णिमा, स्नान करने से मिलता है ये बड़ा लाभ

LUCKNOW. कार्तिक पूर्णिमा का क्या महत्व है। इसे क्यों मनाया जाता है। इसको लेकर हर किसी के मन में सवाल उठते हैं। फर्क इंडिया आज आपको कार्तिक पूर्णिमा के महत्व और इससे क्या लाभ मिलता है को लेकर जानकारी दे रहा है। – FARKINDIA.ORG

कार्तिक पूर्णिमा

 

कार्तिक पूर्णिमा का क्या है मतलब

कार्तिक पूर्णिमा यानि चन्द्रमा की पूर्णअवस्था। पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा ठीक 180 अंश पर होता है। उस दिन चन्द्रमा से जो किरणें निकलती है, वह काफी सकारात्मक होती है और वह किरणें सीधे दिमाग पर असर डालती है। चूंकि चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे अधिक नजदीक है, इसलिए पृथ्वी पर सबसे ज्यादा प्रभाव चन्द्रमा का ही पड़ता है।

 

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स्नान का विशेष महत्व

कार्तिक माह में स्नान का विशेष महत्व होता है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान करना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 3 नवंबर दोपहर 1 बजे से शुरु होकर 4 नवंबर सुबह 10 बजे तक है। कार्तिक माह में किए स्नान का फल, एक हजार बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के समान, वैशाख माह में नर्मदा नदी पर करोड़ बार स्नान के बराबर माना जाता है। जो फल कुम्भ में प्रयाग में स्नान करने पर मिलता है, वहीं फल कार्तिक माह में किसी भी पवित्र नदी के तट पर स्नान करने पर मिलता है।

विशेष पुण्य की प्राप्ति

कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय होने के पश्चात् स्नान का महत्व कम हो जाता है। इसलिए इस दिन सभी मनुष्यों को सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए। ऋषि अंगिरा ने स्नान के बारे में लिखा है कि इस दिन जातकशास्त्रों के नियमों का पालन करते हुए स्नान करते समय सबसे पहले हाथ पैर धोना चाहिए। इसके बाद आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें।

कैसे दें दान

दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें। इसी प्रकार यदि जातक यज्ञ और जप कर रहा हैं तो पहले संख्या का संकल्प कर लें फिर जप और यज्ञादि कर्म करें। इस दिन जातक को मां गंगा, भगवान शिव, विष्णु जी और सूर्य देव का स्मरण करते हुए नदी या तालाब में स्नान के लिए प्रवेश करना चाहिए। स्नान करते समय आधा शरीर तक जल में खड़े होकर विधिपूर्वक स्नान करना चाहिए।

बताया जाता है कि गृहस्थ व्यक्ति को काला तिल तथा आंवले का चूर्ण लगाकर स्नान करने से असीम पुण्य की प्राप्ति होती है, लेकिन विधवा तथा संन्यासियों को तुलसी के पौधे की जड़ में लगी मिट्टी को लगाकर ही स्नान करना चाहिए।

फोटोः फाइल। 

 

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