अखिलेश और मुलायम का 13 प्वाइंट रोस्टर से है गहरा नाता, पूरा पढ़िए

लखनऊ. खबर की शुरुआत एक शेर से करते हैं। ये पंक्तियां जनाब मुज़फ्फर रज़मी की हैं, 1974 में आल इंडिया रेडियो से ब्राडकास्ट हुआ, तो मुल्क भर में आम फेम शेर बन गया। ये लाइन है लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई ! महरूम-ऐ-हकीक़त है साहिल के तमाशाई ! हम डूब के समझे है दरिया की गहराई !!

शेर बहुत कुछ कहता है, इस शेर की तरह है कि कुछ नेताओं की कारगुजारियां भीं। जिस 13 प्वाइंट रोस्टर को लेकर बावाल मचा है। उच्च शिक्षा से लेकर सभी सरकारी विभागों में नौकरियों का सही से बंटवारा नहीं हो पा रहा है। उसके पीछे उन नेताओं की ही कहानी है। जो आज तख्तियां लेकर इसका विरोध करते हैं।

सच तो ये है कि जब 2 जुलाई वर्ष 1997 को 13 प्वाइंट रोस्टर को लागू किया गया उस समय आईके गुजरात की सरकार थी। यह जनता पार्टी की सरकार थी और उसी सरकार में मुलायम सिंह यादव सबसे मजबूत नेता थे और रक्षा मंत्री बने थे।

सेना के जवानों के लाशों को घर भेजने का आदेश इसी सरकार में मुलायम सिंह यादव ने दिलवाया था। यह मुलायम सिंह यादव का सेना के इतिहास का सबसे बड़ा कदम माना जाता है, लेकिन इस दौरान ही 13 प्वाइंट रोस्टर भी सरकार लागू कर रही थी। इसको लेकर मुलायम सिंह यादव पूरी तरह से उदासीन रहे। इसके बाद यह रोस्टर धीरे धीरे अन्य प्रदेशों में भी लागू होता रहा। इस रोस्टर को लागू करने के पीछे लोगों की मंशा ये थी कि इसके दो साल पहले ही मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू हुई थी। ये रोस्टर मंडल के आरक्षण को कमजोर कर रहा था।

उत्तर प्रदेश में हाल ही में जब अखिलेश यादव की सरकार थी, तो इस 13 प्वाइंट रोस्टर को उत्तर प्रदेश में लागू कर दिया गया। इस दौरान न तो विरोध हुआ और न ही किसी ने संज्ञान लिया। फर्क इंडिया हिन्दी पत्रिका ने इस रोस्टर के खिलाफ उस दौरान भी रिपोर्ट प्रकाशित की थी, लेकिन प्रसार संख्या सीमित होने की वजह से इस मुद्दे को दबा दिया गया।

इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि सिविल सेवाओं में त्रिस्तरीय आरक्षण को लागू करवाने के लिए अखिलेश यादव सरकार में जिस तरह से प्रतियोगी छात्रों पर लाठियां बरसाई गई थीं, ठीक इसी तरह 13 प्वाइंट रोस्टर का विरोध करने पर उस समय भी पिटाई होती।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि वास्तव में 13 प्वाइंट रोस्टर का जनक कौन है और इसको लागू करनेवाला या कह सकते हैं इसका समर्थक कौन रहा है। अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के समय में इस रोस्टर का विरोध कभी नहीं किया गया। यहां तक कि अखिलेश यादव ने खुलकर अपनी सरकार में इसे लागू करवाने का काम किया था।

5 मार्च को पूरे देश में बंद का बिगुल बज रहा है। ऐसे में जरूरी है ये जानना कि आपके नेता आपके लिए किस तरह का काम करते हैं। आंदोलन अपनी जगह है, लेकिन नेताओं का सच भी सामने आना चाहिए।

फोटोः फाइल। 

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